धनपालथान–५ के दलित समुदायक समक्ष अवसर आ चुनौतीसभ

मिति: २०२६-०६-२८ , समय : २३:३०:३५ , Our Pradesh

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बदलैत धनपालथान–५क दलित समुदायक अवस्था

“लगभग तीन दशक पहिने, जखन हम छोट रही, तखन एकटा उच्च जातिक पुरुष केवल हुनकर घरमे मोही फेटबाक मदानी छू लेल हमरा एतेक जोर सँ थप्पड़ मारने छलथि जे हमर कानक जाली फूटि गेल छल। आइ ओही व्यक्ति, जखन हम वडा सदस्य बनि गेलहुँ, तँ आदर सँ पूछैत छथि—’नानी, वडाक योजना की अछि?’ ओ समय बहुत पीड़ा होइत छल, मुदा आइ ओहि घटनाकेँ याद करैत परिवर्तनक अनुभूति होइत अछि।”

 

धनपालथान गाउँपालिका–५क वडा सदस्य रेखादेवी सरदार जखन अपन बितल जीवनक याद करैत छथि तँ आइयो हुनकर आँखिक सामने ओहि दिनक दृश्य ताजा भई जाइत अछि। जातिक कारण अपमानित होएबाक ओ घटना केवल हुनकर व्यक्तिगत पीड़ा नहि छल, बल्कि दलित समुदाय द्वारा दशकौं सँ सहल जा रहल सामाजिक विभेद आ असमानताक प्रतीक छल। ओहि समय केवल मदानी छूएबाक आरोपमे सार्वजनिक रूप सँ अपमानित होएबाक पीड़ा हुनकर मनमे गहींर घाव छोड़ि देने छल। मुदा समयक संग ओहि पीड़ाक रूपान्तरण संघर्षक शक्तिमे भई गेल।

 

रेखादेवी ओहि घटनासँ हारि माननिहार व्यक्ति नहि रहली। ओ विभेदकेँ कमजोरी नहि, बल्कि परिवर्तनक प्रेरणा बनौलनि। ओ अपन पढ़ाइ जारी रखली, सामाजिक अभियानसभमे सक्रिय रूप सँ जुड़ली, आ विभिन्न सामाजिक संस्थासभक सहयोग सँ महिला, दलित आ विपन्न समुदायक हक–अधिकारक लेल काज करैत रहली। गाम–टोलमे होइत अन्यायक विरुद्ध आवाज उठाबई लगलापर समाज सेहो हुनकाप्रति सम्मानक दृष्टिसँ देखइ लागल। अन्ततः वि.सं. २०७४ सालक स्थानीय तह निर्वाचनमे ओ जनप्रतिनिधिक रूपमे निर्वाचित भेली। आइ ओ दोसर कार्यकालमे सेहो वडा सदस्यक रूपमे कार्यरत छथि आ अपन जकाँ दलित, विपन्न आ सीमान्तकृत समुदायक आवाज बनिमे सफल भेल छथि।

 

ओ कहैत छथि, “पहिने हमरा सभकेँ बाजबाक अधिकार सेहो बहुत कम छल। सभा–समारोहमे पछिला भागमे बैसऽ पड़ैत छल, अपन बात राखबामे सेहो हिचकिचाहट होइत छल। मुदा आइ हम सभ निर्णय लेबाक स्थान धरि पहुँचि गेल छी। ई स्थानीय सरकार आ लोकतंत्रक सबसँ पैघ उपलब्धि अछि।”

 

रेखादेवीक जीवन यात्रा केवल एकटा महिलाक सफलताक कथा नहि, बल्कि धनपालथान–५क सम्पूर्ण दलित समुदायमे भेल सामाजिक परिवर्तनक प्रतिबिम्ब सेहो अछि। जे समुदाय एक समय जातिक आधारपर अपमानित होइत छल, ओ आइ अपन प्रतिनिधिमार्फत विकास योजना बनबैत अछि, बजेट विनियोजन करैत अछि आ अपन अधिकारक लेल नीति निर्माण करबाक स्थान धरि पहुँचि गेल अछि। विभेदक घाव पूर्ण रूपेँ नहि भरल अछि, मुदा सम्मान आ अवसरक नवका द्वार अवश्य खुलि गेल अछि।

हुनकर कथा स्पष्ट रूप सँ देखबैत अछि जे सामाजिक परिवर्तन केवल कानून बनलासँ नहि होइत अछि। अवसर, शिक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व आ स्थानीय नेतृत्व जखन एक संग काज करैत अछि, तखन परिवर्तन व्यवहारमे उतरत अछि। धनपालथान–५मे स्थानीय सरकार गठनक बाद देखल गेल परिवर्तनक यात्रा सेहो एहि यथार्थक एकटा सशक्त उदाहरण अछि।

 

दलित समुदायक बहुलता वाला वडा

 

मोरङ जिलाक दक्षिणी क्षेत्रमे अवस्थित धनपालथान गाउँपालिका कृषि, व्यापार आ सांस्कृतिक विविधताक लेल प्रसिद्ध स्थानीय तह अछि। साविकक नोचा, कदमाहा, दादरबैरिया, अमाही बरियाती आ सोराभाग गाविसकेँ समेटिकऽ वि.सं. २०७३ सालमे एहि गाउँपालिकाक गठन कएल गेल छल। कुल ७ वटा वडा वाला एहि गाउँपालिकामे वडा नम्बर–५ दलित समुदायक सर्वाधिक बसोबास वाला वडा अछि।

 

एहि वडाक कुल जनसंख्यामे लगभग ७६ प्रतिशत दलित समुदायक लोक छथि। विशेष रूप सँ ऋषिदेव, पासवान, सरदार, चमार लगायत समुदायसभक बहुलता रहलाक कारण एहि वडाकेँ धनपालथानक सबसँ पैघ दलित बस्ती मानल जाइत अछि। एहि सामाजिक संरचनाक कारण वडाक राजनीतिक नेतृत्व सेहो दलित समुदायसँ स्थापित भेल अछि। गयानन्द सरदार लगातार दोसर कार्यकालमे वडा अध्यक्षक रूपमे निर्वाचित भेल छथि।

 

मुदा ई प्रतिनिधित्व सहज रूपमे प्राप्त नहि भेल। बहुत दिन धरि ई वडा गरिबी, अशिक्षा, भूमिहीनता आ जातीय विभेदक चक्रमे फँसल रहल। अधिकांश परिवारक नामपर एक धुर जमीन सेहो नहि छल। लगभग आधा जनसंख्या सुकुम्बासीक रूपमे सरकारी जमीन तथा लोहन्द्रा नदीक किनारक सार्वजनिक क्षेत्रमे झोपड़ी बना कऽ रहबाक लेल बाध्य छल। वर्षाक समय नदीमे बाढ़ि आबैत तँ सबसँ पहिने एहि समुदायक घर डूबि जाइत आ घरबार नष्ट भइ जाइत छल।

आर्थिक अवस्था कमजोर रहबाक कारण अधिकांश परिवार दैनिक ज्यालादारी, कृषि मजदूरी आ परम्परागत श्रमपर निर्भर छल। खेती योग्य जमीन नहि रहबाक कारण दोसरक खेतमे मजदूरी करब बहुतो परिवारक दैनिक जीवन बनि गेल छल। रोजगारक अवसरक अभावमे बहुत युवा सीमावर्ती क्षेत्र होइत भारतक विभिन्न शहरमे मजदूरी करबाक लेल जाइत छलाह। विराटनगरमे रिक्सा चलाकऽ परिवार पालई वाला आ ओहि आमदनी सँ अपन बच्चासभकेँ पढ़ाबऽ वाला दलित परिवारक संख्या सेहो उल्लेखनीय छल।

गरिबीक सीधा असर शिक्षापर पड़ल। वडामे चारिटा विद्यालय रहितो माध्यमिक तहक बाद पढ़बाक लेल बाहर जाए पड़ैत छल। आर्थिक अभावक कारण बहुत विद्यार्थी बीचेमे पढ़ाइ छोड़ि दैत छलाह। विशेष रूप सँ दलित बालिकामे विद्यालय छोड़बाक दर बहुत बेसी छल आ बालविवाहक समस्या सेहो व्यापक छल।

 

स्वास्थ्य, सरसफाइ आ खानेपानीक अवस्था सेहो सन्तोषजनक नहि छल। बहुत बस्तीमे सुरक्षित पिबबाक पानिक पहुँच नहि छल। एकटा ट्युबेलपर अनेक घर निर्भर रहैत छल। पोषणक अभाव, कुपोषण, गर्भवती महिलाक कमजोर स्वास्थ्य तथा शिशु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या सेहो गरिबीसँ जुड़ल छल।

 

सामाजिक रूप सँ खुल्लमखुल्ला जातीय विभेदक घटना आइ कम भई रहल अछि, मुदा पहिने दलित समुदायकेँ सार्वजनिक स्थल, सामाजिक सम्बन्ध आ दैनिक व्यवहारमे विभेद सहनाइ पड़ैत छल—एहि बात स्थानीय बुजुर्गसभ सुनबैत छथि।

सामाजिक कार्यक्रममे समान सहभागिता, नेतृत्व विकास आ निर्णय प्रक्रियामे पहुँच सेहो अत्यन्त कमजोर छल।

 

मुदा स्थानीय सरकार गठनक बाद धीरे-धीरे एहि वडाक अवस्था बदलइ लागल। दलित समुदाय स्वयं नेतृत्वमे पहुँचलाक बाद विकासक प्राथमिकता सेहो दलित, विपन्न आ सीमान्तकृत समुदायक आधारभूत आवश्यकतासभसँ जोड़ल गेल। शिक्षा, स्वास्थ्य, खानेपानी, सड़क, तटबन्ध, सीप विकास आ आयआर्जन सम्बन्धी योजनासभ वर्षौं सँ पछुआएल समुदायमे नव आशा जगौने अछि, स्थानीय रामोदेवी राम बतबैत छथि।

 

दलित समुदायक भविष्य लेल योजना बनबैत वडा अध्यक्ष

 

धनपालथान–५क वडा अध्यक्ष गयानन्द सरदार स्वयं दलित समुदायक प्रतिनिधित्व करैत छथि। ओ धनपालथान गाउँपालिकामे दलित समुदायसँ निर्वाचित एकमात्र वडा अध्यक्ष छथि। वडा सदस्य रेखादेवी सरदार जकाँ हुनकर बाल्यकाल सेहो सहज नहि छल। भूमिहीन दलित परिवारमे जन्मल गयानन्द गरिबी, अभाव आ सामाजिक विभेदक बीच पैघ भेलाह। विद्यालय जाएसँ पहिने घरक काज करैत छलाह आ फुर्सतमे आनक खेतमे मजदूरी सेहो करैत छलाह। हुनकर परिवारक आम्दनीक मुख्य आधार दैनिक मजदूरी छल।

दलित समुदायक दुःख, अभाव आ अपमानकेँ ओ अपन जीवनमे नजदीकसँ अनुभव कएने छथि। एहि अनुभवसँ प्रेरित भई ओ सामाजिक सेवामे सक्रिय भेलाह। दलित, विपन्न आ भूमिहीन परिवारक समस्या समाधान लेल सामाजिक अभियान चलौलनि। जनताक विश्वाससँ ओ लगातार दोसर कार्यकालक लेल वडा अध्यक्ष निर्वाचित भेल छथि।

 

ओ कहैत छथि—”हम सभ जे दुःख भोगने छी, ओ नव पीढ़ीकेँ नहि भोगई पड़य। एहि लेल विकासक प्रत्येक योजनाकेँ दलित, गरीब आ पछुआएल समुदायक घर-घर धरि पहुँचेनाइ हमर पहिल प्राथमिकता अछि।”

 

 

ओ अपन चारि कठ्ठा जमीन निःशुल्क स्वास्थ्य चौकी निर्माण लेल दान देने छथि। हुनकर अनुसार, समाजक हितमे उपयोग भेल जमीन सभसँ पैघ सम्पत्ति अछि। ओ कहैत छथि—”हमर जमीनपर बनल स्वास्थ्य चौकीसँ गामक आमा, दिदी-बहिन, बच्चा आ ज्येष्ठ नागरिक सभकेँ उपचार भेटैत अछि, ई हमर जीवनक सबसँ पैघ सन्तोष अछि।”

हुनकर नेतृत्वमे वडा नम्बर–५ मे खानेपानी, सड़क, तटबन्ध, शिक्षा, स्वास्थ्य, सीप विकास तथा आयआर्जन कार्यक्रमकेँ प्राथमिकता देल गेल अछि। हुनकर अनुसार विकासक अर्थ केवल सड़क वा भवन नहि, बल्कि प्रत्येक बालबालिकाकेँ शिक्षा, प्रत्येक गर्भवती महिलाकेँ उपचार आ प्रत्येक परिवारकेँ सम्मानपूर्वक जीवन उपलब्ध करेनाइ अछि।

 

गरिबीसँ जुड़ल विभेद

 

धनपालथान–५क अधिकांश दलित परिवार भूमिहीन छथि। लगभग ५० प्रतिशत परिवार आइयो सुकुम्बासीक रूपमे सरकारी तथा ऐलानी जमीनपर झोपड़ी बनाकऽ रहैत छथि। वर्षाक समय लोहन्द्रा नदीमे बाढ़ि आबैत तँ सभसँ बेसी क्षति एहि बस्तीकेँ होइत अछि। घर, अन्न आ सम्पत्ति नष्ट होइत रहैत अछि।

 

रोजगारक अभाव सेहो पैघ समस्या अछि। अधिकांश परिवार दैनिक मजदूरी आ कृषि मजदूरीपर निर्भर छथि। अपन जमीन नहि रहबाक कारण आनक खेतमे मजदूरी कऽ परिवार चलाबैत छथि। स्थायी रोजगारक अभावमे बहुत युवा भारतक विभिन्न शहरमे मजदूरी लेल जाइत छथि।

 

गरिबीक असर शिक्षापर सेहो पड़ल अछि। वडामे विद्यालय रहितो कक्षा १२ धरि पढ़ाइकेँ व्यवस्था नहि अछि। एहि कारण बहुत विद्यार्थी आर्थिक अभावमे बीचेमे पढ़ाइ छोड़ि दैत छथि। विशेष रूपसँ दलित बालबालिकामे विद्यालय छोड़बाक दर बेसी अछि। किताब, पोशाक, कापी आ यातायात खर्च जुटाबऽमे कठिनाइ होइत अछि।

 

दलित किशोरीसभक अवस्था आरो चुनौतीपूर्ण अछि। गरिबी, सामाजिक चेतनाक कमी आ परम्परागत सोचक कारण बालविवाह पूर्ण रूपेँ समाप्त नहि भेल अछि। परिणामस्वरूप हुनकर शिक्षा, स्वास्थ्य आ आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रभावित होइत अछि।

स्वास्थ्य सेवामे सेहो पर्याप्त पहुँच नहि अछि। पोषणयुक्त भोजन, सुरक्षित पानि आ गुणस्तरीय उपचारक अभावमे गर्भवती महिला, सुत्केरी आ बालबालिका बेसी जोखिममे रहैत छथि। कुपोषण, रक्तअल्पता आ बालस्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या सेहो देखल जाइत अछि।

 

जातीय छुआछूतक खुल्लमखुल्ला घटना पहिनेक अपेक्षा घटल अछि, मुदा मनोवैज्ञानिक असर आइयो पूर्ण रूपेँ समाप्त नहि भेल अछि। तथापि स्थानीय सरकार गठनक बाद दलित समुदायक राजनीतिक सहभागिता, नेतृत्व क्षमता आ आत्मविश्वासमे उल्लेखनीय वृद्धि भेल अछि।

 

स्थानीय सरकार आबलाक बाद परिवर्तनक शुरुआत

 

स्थानीय सरकार गठनसँ पहिने वडा नम्बर–५ मे विकासक आधारभूत सुविधा अत्यन्त कमजोर छल। सुरक्षित पिबबाक पानिक पहुँच सीमित छल। बहुत परिवार एक-दुइ ट्युबेलपर निर्भर छल। वर्षाक समय दूषित पानिसँ विभिन्न रोग फैलैत छल।

 

लोहन्द्रा नदीक किनारमे बसोबास करई वाला परिवार प्रत्येक वर्ष बाढ़िक त्रास झेलैत छल। सड़कक अवस्था खराब रहबाक कारण वर्षातमे आवागमन बन्द भई जाइत छल। बिरामीकेँ अस्पताल लइ जाएब सेहो कठिन छल।

 

२०७४ सालमे स्थानीय सरकार गठनक बाद वडा अध्यक्ष गयानन्द सरदार आधारभूत आवश्यकताकेँ प्राथमिकता दैत विकास योजना शुरू कएलनि। विभिन्न बस्तीमे ट्युबेल वितरण, सुरक्षित पानिक व्यवस्था, फिल्टर वितरण तथा लोहन्द्रा नदी किनार तटबन्ध निर्माण कएल गेल। एहि योजनासँ सयौं परिवार लाभान्वित भेल।

वडामे लगभग १५ किलोमिटर सड़क ग्राभेल आ कालोपत्रे कएल गेल। आब एम्बुलेन्स आ अन्य सवारीसाधन गाम धरि पहुँचऽ लागल अछि। वडा सदस्य रेखादेवी सरदार कहैत छथि—”पहिने बिरामीकेँ बाँसक खाटपर बोहिकऽ कर्सिया धरि लऽ जाए पड़ैत छल, मुदा आब सड़क बनलाक बाद ई समस्या बहुत घटि गेल अछि।”

शिक्षाकेँ प्राथमिकता

 

वडा नम्बर–५ मे गरीबीक कारण विद्यालय छोड़बाक (ड्रपआउट) दर बहुत दिनसँ चुनौतीक विषय रहल अछि। बहुत अभिभावक दैनिक मजदूरीमे व्यस्त रहबाक कारण अपन बाल–बच्चाक पढ़ाइपर पर्याप्त ध्यान नहि दई पबैत छलाह। कतेको विद्यार्थी आर्थिक अभावक कारण विद्यालयक पोशाक, किताब–कापी आ अन्य शैक्षिक सामग्री जुटाबइमे असमर्थ रहैत छलाह, जाहि कारण ओ बीचेमे पढ़ाइ छोड़ऽ लेल बाध्य होइत छलाह। विशेष रूपसँ दलित समुदायक बालबालिकासभमे उच्च शिक्षाधरि पहुँचइ वला संख्या बहुत कम छल।

 

एहि अवस्थामे सुधार आनबाक लेल वडामे दलित बालबालिकाकेँ विद्यालयमे टिकौने रखबाक विशेष अभियान चलाओल गेल अछि। आमा समूह गठन कऽ घर–घर जा विद्यालय नहि जाएवला बालबालिकाकेँ फेरसँ विद्यालय लाबऽक प्रयास कएल जा रहल अछि। कमजोर आर्थिक अवस्था रहल विद्यार्थीसभकेँ शैक्षिक सामग्री वितरण कएल गेल अछि। एतबे नहि, निःशुल्क ट्युसन कक्षाक संचालन कऽ हुनकर शैक्षिक उपलब्धिमे सुधार करबाक प्रयास सेहो भऽ रहल अछि।

वडा अध्यक्ष गयानन्द सरदार कहैत छथि, “राज्यद्वारा देल जाएवला दिवा खाजाक अतिरिक्त वडासँ आरो की कएल जा सकैत अछि, एहि विषयपर हम सभ निरन्तर विचार–विमर्श कऽ रहल छी। हमर मुख्य उद्देश्य अछि जे दलित बालबालिका विद्यालय छोड़ि बाहर नहि जाउ।”

 

मातृ आ शिशु स्वास्थ्यपर विशेष ध्यान

 

पहिने पोषणक कमी, आर्थिक विपन्नता आ गुणस्तरीय स्वास्थ्य सेवामे सीमित पहुँचक कारण गर्भवती महिला आ बालबालिकाक स्वास्थ्य अवस्था चिन्ताजनक छल। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराबइक बानी कम छल। पर्याप्त पोषण नहि भेटबाक कारण कुपोषण, रक्तअल्पता आ मातृ–शिशु स्वास्थ्य सम्बन्धी जोखिम बहुत बेसी छल।

 

स्थानीय सरकार गठनक बाद वडामे एहि क्षेत्रमे विशेष कार्यक्रम सञ्चालन कएल जा रहल अछि। गर्भवती महिलाकेँ पौष्टिक आहार उपलब्ध कराबइक उद्देश्यसँ प्रत्येक गर्भवती महिलाकेँ प्रतिदिन एकटा हिसाबसँ कुल १२० गोट अण्डा वितरण करबाक कार्यक्रम चलाओल गेल अछि। एकर अतिरिक्त चना सहित अन्य पोषणयुक्त खाद्य सामग्री सेहो वितरण कएल जा रहल अछि।

स्वास्थ्य सेवाकेँ सहज बनेबाक लेल वडा अध्यक्ष गयानन्द सरदार अपन चारि कठ्ठा जमीन निःशुल्क उपलब्ध करौलनि, जाहिपर स्वास्थ्य चौकी निर्माण भेल। एकर संग–संग निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर सञ्चालन कइ विशेषज्ञ चिकित्सकसभसँ उपचार सेवा देबाक व्यवस्था सेहो शुरू भेल अछि। एहि प्रयाससँ विशेष रूपसँ विपन्न दलित परिवारकेँ अपनहि गाममे स्वास्थ्य सेवा प्राप्त होमऽ लागल अछि।

 

सीपसँ बदलैत जीविका

 

दलित समुदायक अधिकांश परिवार दैनिक ज्यालादारी आ कृषि मजदूरीपर निर्भर छल। स्थायी रोजगारक अभावक कारण बहुत युवा भारतक विभिन्न शहरमे मजदूरी करइ लेल बाध्य होइत छलाह। सीपक कमी रहबाक कारण नीक आम्दनी होएवला पेशामे प्रवेश करब सेहो कठिन छल।

 

एहि अवस्थाकेँ बदलबाक लेल वडामे सीपमूलक तालिमकेँ प्राथमिकता देल गेल अछि। सवारी चालक, राजमिस्त्री, प्लम्बर आदि सम्बन्धी तालिम सञ्चालन कइ युवासभकेँ स्वरोजगार आ रोजगारसँ जोड़बाक प्रयास कएल जा रहल अछि। एहि प्रयाससँ बहुत युवाकेँ वैदेशिक अथवा सीमापार मजदूरीक विकल्प खोजबामे सहायता भेटल अछि।

 

दलित महिलाक आर्थिक सशक्तीकरण लेल सिलाइ–बुनाइ, क्रिस्टल सामग्री निर्माण आदि तालिम सञ्चालन कएल गेल अछि। सिलाइ–बुनाइक तालिम पूरा कएने महिलासभकेँ ५० प्रतिशत अनुदानपर सिलाइ मशीन उपलब्ध कराओल गेल अछि। अत्यन्त विपन्न महिलासभकेँ दातृ निकायक सहयोगसँ निःशुल्क सिलाइ मशीन सेहो वितरण कएल गेल अछि। एहि कार्यक्रमसँ बहुत महिला अपनहि गाममे रहि आम्दनी करई लागल छथि।

विभेद घटल अछि, मुदा चुनौती आबो बाकी अछि

 

स्थानीय धनियाँदेवी सरदारक अनुसार, पहिने जेकाँ खुल्लमखुल्ला होएवला जातीय छुआछूतक घटना आब बहुत कम भइ गेल अछि। मुदा स्थानीय लाछो सरदारक अनुसार मल वितरण लगायत किछु सेवामे आबो जातीय विभेद देखल जाइत अछि। हुनकर कहब अछि जे खुला विभेद कम भेल अछि, मुदा पूर्ण रूपेँ समाप्त नहि भेल अछि।

शिक्षा, स्वास्थ्य आ अन्य आधारभूत सेवामे आबो उच्च जातिक तुलनामे दलित समुदायक पहुँच कम अछि। आर्थिक विपन्नता, चेतनाक कमी आ अवसरक असमान पहुँचक कारण दलित समुदायकेँ आबो बहुत क्षेत्रमे पछुआएल रहऽ पड़ैत अछि।

 

तथापि दलित समुदायक राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ल अछि। निर्णय प्रक्रियामे हुनकर सहभागिता निरन्तर बढ़ि रहल अछि। रेखादेवी सरदार जेकाँ जनप्रतिनिधिक नेतृत्वसँ नव पीढ़ीमे आत्मविश्वास सेहो बढ़ल अछि।

 

मुदा परिवर्तनक यात्रा आबो पूरा नहि भेल अछि। भूमिहीनता, बेरोजगारी, उच्च शिक्षामे सीमित पहुँच, सुरक्षित आवास, दिगो आय–आर्जन, बालविवाह तथा सुरक्षित पिबबाक पानिक पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करबाक लेल आबो बहुत काज करबाक आवश्यकता अछि। तथापि स्थानीय सरकार गठनक बाद शुरू भेल एहि प्रयाससभ धनपालथान–५क दलित समुदायकेँ अधिकार, सम्मान आ अवसरक दिशामे आगाँ बढ़ेबाक मजबूत आधार तैयार कइ देने अछि।

वडा सदस्य रेखादेवी सरदारक कानपर लागल ओ थप्पड़ केवल एक व्यक्तिक पीड़ा नहि छल, बल्कि सम्पूर्ण समुदायक उपर भेल विभेदक प्रतीक छल। आइ ओही रेखादेवी जनप्रतिनिधिक रूपमे विकास योजना बनाबऽवला स्थानपर पहुँचि गेल छथि। ई परिवर्तन केवल हुनकर व्यक्तिगत सफलताक कथा नहि, बल्कि स्थानीय लोकतंत्रद्वारा सीमान्तकृत समुदायकेँ भेटल अवसरक प्रमाण सेहो अछि।

 

धनपालथान गाउँपालिका–५ आबो गरीबी, भूमिहीनता, बेरोजगारी आ सामाजिक चुनौतीसभसँ संघर्ष कई रहल अछि। मुदा स्थानीय सरकारक नेतृत्वमे शिक्षा, स्वास्थ्य, खानेपानी, सड़क, सीप विकास आ सामाजिक सशक्तीकरणक क्षेत्रमे भेल प्रयाससभ परिवर्तनक मजबूत आधार तैयार कई रहल अछि।

 

जे समुदाय पहिने जातिक आधारपर अपमान सहइ लेल बाध्य छल, ओ आइ अपनहि नेतृत्वमे अपन भविष्य निर्माण करबाक यात्रामे आगाँ बढ़ि रहल अछि। ई परिवर्तन धनपालथान–५क सभसँ पैघ उपलब्धि अछि।

 

प्रकाशित मिति: २०२६-०६-२८ , समय : २३:३०:३५ , ३ महिना अगाडि

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